भारत के 5 दुर्लभ सिक्के

भारत के 5 दुर्लभ सिक्के

बेशक़ीमती होने के लिए सिक्के का बहुत पुराना होना ज़रूरी नहीं होता । संग्राहक और मुद्रा-विशेषज्ञ दुर्लभ सिक्कों के लिए काफ़ी पैसे खर्च करते है, चाहे वो कहीं भी ढ़ाले गए हों ।इनमें से कुछ सिक्के ऐसे होते हैं जो किसी के सम्मान में जारी किए जाते हैं ।उन्हें आम जनता के लिए जारी नहीं किया जाता।यहां भारत के 5 सबसे बेशकीमती सिक्के हैं।

1. पैट्रिक ब्रिंडली के मूल के सिक्के (1949)

सन 1949 में, पैट्रिक ब्रिंडले ने सिक्कों का एक सेट तैयार किया था। यह सिक्के आमतौर पर नमूने के तौर पर ढ़ाले जाते हैं। यह नए डिज़ाइन या पुराने सिक्कों के डिज़ाइन में सुधार लाने के लिए ढाले जाते हैं। फिर इन्हें निर्णायकों या निर्माण करवाने वालों के सामने पेश किया जाता है ताकि आम लोगों के लिए जारी करने से पहले इनकी डिज़ाइन के बारे में अंतिम निर्णय लिया जा सके। अगर इनके डिज़ाइन को खारिज कर दिया जाता है, तो इन सिक्कों को प्रचलन में नहीं लाया जाता । इसलिए इन्हें नमूने के सिक्के कहा जाता है।

सन 1947 में, स्वतंत्र भारत यानी एक नए राष्ट्र के लिए नए सिक्कों की शुरुआत करने की आवश्यकता महसूस की गई। नए डिज़ाइन तैयार करने के बाद ,सन 1950 में नए सिक्के जारी किए गए थे। सन 1948 और सन 1949 में कोई सिक्का जारी नहीं किया गया। हालांकि सन 1949 में, कुंदाकार और कलाकार पैट्रिक ब्रिंडले ने 2 आने से लेकर 1 रुपये तक के 8 सिक्के डिज़ाइन किए थे। यह ज्ञात नहीं है कि क्या ये नमूनों तैयार करने के लिए नए सांचे बनाए गए थे, या इन सिक्कों को तैयार करने के लिए पर नापतोल के नए तरीक़े अपनाए गए थे। कई कारणों से सन 1949 में तैयार किए गए सभी नमूनों को रद्द कर दिया गया था। इसी वजह से अगले वर्ष अन्य डिजाइन पेश किए गए थे।

सन 2013 में, नमूने के सिक्कों का ऐसा ही एक सेट लंदन में बाल्डविन नीलामी में सामने आया था जो 52,000 पाउंड में बिका था।

2 –  जवाहरलाल नेहरू के सम्मान में जारी सिक्का (1964)

मई सन 1964 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद, बॉम्बे टकसाल ने उनके सम्मान में पहला सिक्का जारी किया। इस तरह के यादगारी सिक्के ससे पहले कभी नहीं ढ़ाले गए थे। प इसन तरह एक नई मिसाल क़ायम हुई । जवाहरलाल नेहरू की याद में सिक्के 1 रुपये और 50 पैसे के मूल्य के थे। वे 14 नवंबर 1964 को जारी किए गए थे। दोनों सिक्के शुद्ध निकल से बने थे ।उन पर बाईं तरफ़ नेहरू का बिना टोपीवाला सिर बना था। पर की तरफ़ नेहरू का नाम “जवाहरलाल नेहरू” लिखा था। नीचे की तरफ़ उनके जन्म और मृत्यु के सन “1889-1964” लिखे थे। सिक्के के पीछे की तरफ़ ऊपर मुख्य प्रतीक अशोक स्तंभ बना था और नीचे अंकों में मूल्य लिखा था । 50 पैसे के सिक्के दो प्रकार के थे। एक पर नेहरू का नाम अंग्रेजी में और दूसरे पर हिंदी में लिखा था। सन 2011 में यानी 47 साल पहले ढ़ले इन सिक्कों 65,000 रुपये में बिके ।

जवाहरलाल नेहरू स्मारक 1 रुपये (L) और 50 पैसे (R) के सिक्के | ओसवाल ऑक्शन 

3- बृहदेश्वर मंदिर स्मृति सिक्का (2010)

2010 में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने 1000 रुपये का सिक्का जारी किया था। यह सिक्का भारतीय रिजर्व बैंक ने तमिलनाडु के तंजावुर में प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर के 1000 साल पूरे होने पर जारी किया गया था। इस प्रसिद्ध बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण, महान राजा, राजा चोल ने शुरू करवाया था जो सन 1010 में पूरा हो गया था । इसे देखते हुए कि इस तरह के, यानी किसी के सम्मान में ढ़ाले गए सिक्केल जारी नहीं किए जाते हैं , इन्हें जारी करने क फ़ैसला किया गया। शीशे की तरह चमकनेवाले इन सिक्कों का मूल्य और भी ज़्यादा हो जाता है। इस तरह के सिक्कों को जारी करने से पहले भारतीय रिज़र्व बैंक प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन देता है। यह सिक्के किसी ऑनलाइन टकसाल पोर्टल्स से या रिज़र्व बैंक काउंटरों से भी खरीदे जा सकते हैं।

शिवलिंग की पूजा करते हुए श्री राम और सीता का चित्र

4. 2 रुपये का प्रायोगिक सिक्का (2014)

सन 2014 में, भारत सरकार ने 2 रुपये का प्रायोगिक सिक्का तैयार किया, जो ब्रेल भाषा में था। प्रायोगिक सिक्कों को नमूने के तौर ढ़ाला गया था , जिसके बाद यह तय किया जाना था कि सिक्कों को सार्वजनिक रूप से जारी किया जाएगा या नहीं। हालाँकि, यह सिक्का कभी जारी नहीं किया गया। सिक्के के सामने वाले हिस्से पर अशोक स्तंभ और सिक्के के पीछे वाले हिस्से पर मूल्य लिखा था । इसके अलावा सिक्के के पीछे अंग्रेजी में एक्सपीट  EXPT शब्द और ब्रेल भाषा में लिखा था । सिक्का कभी जारी नहीं हुआ इसिलिए वह दुर्लभ बन गया । इस तरह का एक सिक्का, 2014 में, 40,000 रुपये में, अहमदाबाद की क्लासिकल न्यूमिज़माटिक्स गैलरी में बिका था।

2 रुपये का प्रायोगिक सिक्का | शास्त्रीय नुमिस्मैटिक गैलरी 

5. 50 पैसे का रद्द सिक्का (1985)

सन 1985 में, बॉम्बे टकसाल से स्टील के बने 50 पैसे के सिक्के ढ़ाले गए। हालांकि, इसे आधिकारिक तौर पर टकसाल से रद्द कर दिया गया था और डिज़ाइन को कभी भी जारी नहीं किया गया था। सिक्के पर रद्दी करने की मुहर का निशान भी है। इसीलिए यह अत्यंत दुर्लभ की श्रेणी में शामिल हो गया । क्लासिक न्यूमिज़माटिक्स गैलरी में नीलामी के दौरान यह विशेष सिक्का 70,000  रुपये में बिका था।

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