इमारतों से आबाद, इलाहाबाद

इमारतों से आबाद, इलाहाबाद

अक्टूबर २०१८ में सरकार ने इलाहाबाद शहर का नाम बदल कर ‘प्रयागराज’ कर दिया। पर क्या आपको पता हैं कि यह नाम अंग्रेज़ो ने रखा था जब उन्होंने दो क्षेत्र, प्रयाग और इलाहाबास को जोड़ने का फैसला किया? १५७५ (सी.ई.) में मुग़ल बादशाह अकबर ने प्रयाग के नज़दीक एक नये शहर को स्थापित किया, १८८३ में उसका नाम इलाहबास रखा गया। शाह जहान (१५९२-१६६६) के राज के दौरान इलाहाबास का नाम इलाहाबाद में बदला गया, फिर अंग्रेज़ो ने क्षेत्र को बढाकर अल्लाहाबाद बना दिया। ‘अकबरनामा’ में अल्लाहाबाद क़िला को शहंशाह अकबर का सबसे विशाल क़िला बताया गया हैं। राजा टोडरमाल इसके विशेष शिल्पकार थे। इसे बनाने में ४५ साल लगे।

यह संकुल अपने में ही एक पूरा शहर था। इस संकुल की कुछ विशेष इमारते हैं:

मकबरे के गलियारे

चालीस सतून – इस सुन्दर दीवानखाने का नाम फ़ारसी में ‘बरगाह-इ-चिहिल सतून’ था, जिसका मतलब हैं चालीस स्थम्बो का सभामंडप। इसे १८५७ के सिपाही उत्परिवर्तन के दौरान गिरा दिया गया।

रानी महल 

रानी महल – यह संकुल की सबसे अलंकृत इमारत हैं। इसे शहंशाह की सबसे प्रिय बेगम, मरियम-उज़-ज़मानी उर्फ़ हरखा बाई के लिए बनाया गया था। १७६५ के अल्लाहाबाद संधि के बाद, जब अंग्रेज़ो ने क़िले पर कब्ज़ा कर लिया, तो इस महल को उन्होंने अपने रहने की जगह बना दी। कुछ सालो बाद जब लॉर्ड कर्ज़न यात्रा दौरान यहाँ आए, तो महल की बुरी हालत देख कर हैरान हो गए। उन्होंने तुरंत स्थिति को सुधारने का आदेश दे दिया।

मकबरे के गलियारे

अल्लाहाबाद स्थम्ब – संकुल के अंदर एक स्तम्भ हैं, जिसको राजा अशोक ने ३ (बी.सी.ई.) में स्थापित किया था। इस पर मशहूर प्रयाग प्रहस्ति या अल्लाहाबाद प्रहस्ति शिलालेख हैं, जिससे हमें पुरातत्व भारत की अमूल्य जानकारी प्राप्त हुई हैं।

मोती महल

मोती महल – इस विशाल हवेली को इलाहाबास के स्थापना से भी पहले राजा टोडरमल के लिए बना गया था। आज यह इमारत बहुत ही जीर्ण स्थिति में हैं।

खुसरो बाग

खुसरो बाग – यह सुन्दर मक़बरा संकुल १८५७ के सिपाही उत्परिवर्तन के दौरान मुख्यालय कि तरह इस्तेमाल किया गया था। यह मुग़ल कलात्मकता का विशेष उदाहरण हैं।

आज की तारीक़ में अल्लाहाबाद के इस अनोखे क़िले में आम जनता का प्रवेश मना हैं, चूकि यह भारतीय सेना की जगह हैं। पर दुर्भाग्यवश सालो की उपेक्षा ने इस महत्वपूर्ण स्थल को बहुत ही असुरक्षित स्थिति तक पहुंचा दिया हैं।

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